तलाक के बाद इन कलाकारों को हुआ दोबारा प्यार
मधुलिका सिंह
मुंबई : कई लोग शादी के बाद अपने पार्टनर से अलग होकर टूट जाते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने आपको दूसरा मौका देते हैं और किसी नए पार्टनर के साथ जुड़ जाते हैं. बॉलीवुड के कई मशहूर कलाकार ऐसे हैं जिनकी पहले शादी हुई, फिर उनका तलाक हुआ. तलाक के बाद वह टूटे नहीं. वह कैरियर में आगे बढ़े, उन्होंने अपने आपको मौका दिया और उन्हें दोबारा प्यार हुआ. अब ये कलाकार या तो शादीशुदा हैं या फिर किसी और के साथ रिश्ते में हैं. सामंथा रुथ प्रभु ने नागा चैतन्या से साल २०१७ में शादी की और साल २०२१ में दोनों का तलाक हो गया. पति से अलग होने के बाद सामंथा टूटी नहीं बल्कि २०२५ में राज निदिमोरु से दोबारा शादी की. इसी तरह से दीया मिर्जा ने २०१४ में साहिल सागा से शादी की और साल २०१९ में दोनों अलग हो गए. तलाक के बाद दीया मिर्जा ने कारोबारी वैभव रेखी से २०२१ में शादी की. ऋतिक रोशन ने साल २००० में सुजैन खान से शादी की और साल २०१४ में दोनों अलग हो गए. तलाक के बाद ऋतिक रोशन सबा आजाद को डेट कर रहे हैं. सैफ अली खान ने साल १९९१ में अमृता सिंह से शादी की और साल २००४ में अलग हो गए. सैफ ने साल २०१२ में करीना कपूर के साथ शादी की. फरहान अख्तर ने साल २००० में हेयर स्टाइलिस्ट अधुना भबानी से शादी की फिर साल २०१६ में दोनों अलग हो गए. बाद में फरहान अख्तर ने अभिनेत्री शिवानी दांडेकर से साल २०२२ में शादी कर ली. इसी तरह शादी के १९ साल बाद अरबाज खान मलाइका अरोड़ा से अलग हो गए फिर साल २०२३ में मेकअप आर्टिस्ट शूरा खान के साथ शादी कर ली. ऐसे सैकड़ों कलाकारों की सूची है, जो शादी के बाद तलाक फिर शादी और फिर तलाक के बाद शादियां कर रहे हैं और कुछ तो तलाक के बाद दूसरी शादी करने की फिराक में अभी तक कुंआरे हैं.


'डाकिया' हुए डिजिटल वॉरियर
29 लाख पासपोर्ट और 2.35 करोड़ से
अधिक पधार का नामांकन य अपटेट
व्योमेश सिंह
मुंबई : संचार मंत्रालय की ओर से जारी ईयर इंड रिव्यू के अनुसार, भारतीय डाक ने अपने विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए, विशेष रुप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सेवाओं की कमी को दूर करने का काम किया है. पासपोर्ट और आधार सेवा आम नागरिकों को सुविधा देने में डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र जनवरी से नवंबर के बीच, २९ लाख से अधिक पासपोर्ट-संबंधित आवेदनों को प्रोसेस किया, इससे विभाग को ११४.८८ करोड़ रुपए का राजस्व मिला. इसी तरह, देश भर में १३ हजार से अधिक आधार केंद्र डाकघरों से कुल २.३५ करोड़ से अधिक आधार नामांकन और अपडेट किए गए, जिससे १२९.१३ करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया गया. केवाईसी में बड़ा योगदान भारतीय डाक ने म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए लगभग ५ लाख 'डोर-स्टेप केवाईसी' सत्यापन पूरे किए. एएमएफआई, यूटीआई और एसबीआई मयुचुअल फंड जैसे दिग्गजों के साथ हुए समझौतों ने डाकघरों को निवेश वितरण का एक भरोसमंद माध्यम बना दिया है. दूरसंचार के क्षेत्र में अब १.६४ लाख से अधिक डाकघरों में सिम कार्ड की बिक्री और रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध है तकनीकी नवाचार भारतीय डाक ने इसरो और आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से भारत में हर ४X४ मीटर के ग्रिड की विशिष्ट पहचान करती है. लघु उद्योगों और कारीगरों को वैश्विक बाजार देने के लिए 'डाक घर निर्यात केंद्र' की पहल को १ हजार से अधिक केंद्रो तक विस्तारित किया गया. वहीं, रोजगार सृजन में योगदान देते हुए विभाग ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत १.६९ लाख इकाईयों का भौतिक सत्यापन किया. डाक विभाग ने 'हर घर तिरंगा' अभियान ४.० के तहत २८ लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए.


अभिषेक सिंह
मुंबई: गत चैंपियन भारत ने अगले साल होने वाले टी २० विश्व कप के टूर्नाेंट में आईसीसी के नियम के अनुसार अपनी टीम का ऐलान कर दिया है, जबकि सभी टीमों को सात जनवरी तक टीम घोषित करनी है. भारतीय टीम ७ फरवरी से शुरु होने वाले इस टूर्नामेंट में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में उतरेगी, जिसके उपकप्तान अक्षर पटेल हैं. ये दोनों खिलाड़ी २०२४ में भारत को विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. टी २० विश्व कप भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेला जाएगा. भारत के पास अब अपनी जमीन पर टी २० विश्व कप का खिताब बरकरार रखने का सुनहरा अवसर होगा. ईशान-रिंकू की वापसी, गिल और जितेश बाहर भारत ने टी २० विश्व कप के लिए उपकप्तानी की जिम्मेदारी निभा रहे शुभमन गिल और विकेटकीपर जितेश शर्मा को टीम में शामिल नहीं किया हैं. ईशान किशन और रिकू सिंह टी २० विश्व कप का हिस्सा होंगे. भारत ने जो टी २० विश्व कप टीम घोषित की है, उसमें आठ खिलाड़ी ऐसे हैं जो २०२४ वाली टी २० टीम में भी शामिल थे. वहीं, सात खिलाड़ी ऐसे हैं जो अब मौजूदा टीम का हिस्सा नहीं हैं. इसमें रोहित, विराट और जडेजा टी २० अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले चुके हैं. वहीं टीम में जगह बरकरार रखने वाले खिलाड़ियों में सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पांडया, शिवम दूबे, अक्षर पटेल, संजू सैमसन, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह शामिल हैं. हालांकि, यशस्वी जायसवाल, यजुवेंद्र चहल, मोहम्मद सिराज और ऋषभ पंत विश्व कप टीम में जगह नहीं बना सके है. ये चारों खिलाड़ी २०२४ टी २० विश्व कप टीम का हिस्सा थे. कोच गंभीर के सामने कड़ी चुनौती भारत इस बार नए कप्तान और नए कोच के नेतृत्व में उतरेगा. भारतीय टीम के मुख्य कोच गंभीर हैं, जबकि कप्तानी सूर्यकुमार के पास है. लेकिन अब उनके सामने घरेलू जमीन पर टी २० विश्व कप का खिताब बरकरार रखने की चुनौती रहेगी. टी २० विश्व कप २०२६ की भारतीय टीम इस प्रकार है-सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, हार्दिक पांडया, शिवम दूबे, अक्षर पटेल (उपकप्तान), रिकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, वाशिंगटन सुंदर और ईशान किशन (विकेट कीपर).
मैकाले कोई इंडोलॉजिस्ट नहीं था ...


मैकाले कोई इंडोलॉजिस्ट नहीं था. उन्होंने भारत के सामाजिक और शैक्षिक ढ़ांचे को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया. मैकाले का मकसद नफरत के बीज भी बोना था. इससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का धीरे-धीरे पतन हुआ. एक अनुमान के अनुसार, प्राचीन भारत में एक समय ५० से ज्यादा विश्वविद्यालय थे. तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला आदि कुछ जाने माने संस्थानों में तक्षशिला के पूर्व छात्रों में पाणिनी ने अष्टाध्यायी लिखी, और आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना की थी. मैकाले ने अंग्रेजी के माध्यम से भारतीयों को शिक्षित करने के लिए 'डाउनवर्ड फिल्ट्रेशन मेथड' लागू किया. इस तकनीक के तहत स्कूलों में ऊंची जाति को लाभ दिया गया. भारतीय शिक्षा प्रणाली के खत्म होने से कई जातियां एक सदी में गरीब और अनपढ़ हो गईं. १२ अक्टूबर, १८३६ को मैकाले ने अपने पिता को एक पत्र में लिखा कि हमारे इंग्लिश स्कूल बहुत अच्छी तरह से फल-फूल रहे हैं. जिस भी हिंदू ने इंग्लिश शिक्षा प्राप्त की है, वह कभी भी अपने धर्म के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध नहीं रहा है. मुझे पूरा विश्वास है कि अगर हमारी शैक्षिक योजनाएं पूरी हो गई, तो ३० सालों में सम्माननित वर्गों में कोई मूर्तिपूजक नहीं रहेगा. और यह हमारे धर्म परिवर्तन के प्रयासों के बिना ही पूरा हो जाएगा, मैं इस संभावना से बहुत खुश हूं. मैकाले का मिनट सनातन धर्म के आवश्यक सिद्धांतों, अर्थात अहिंसा, सहिष्णुता और आध्यात्मिक बहुलवाद को खारिज करता है, जो एक अंतिम सत्य को थोपता नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के अध्यात्मिक मार्ग प्रदान करता है. भारत की स्वदेशी भाषाओं की हीनता और अंग्रेजी की बौद्धिक श्रेष्ठता में उसका विश्वास भाषाई विविधता और सांस्कृतिक संप्रभुता के प्रति तिरस्कार और ब्रिटिश साम्राज्य के सभ्य बनाने के मिशन के बारे में अहंकार को भी दर्शाता है.
Brand
Explore our sleek website template for seamless navigation.
Contact
Newsletter
info@email.com
123-123-1234
© 2024. All rights reserved.